साल 2025 की विदाई के साथ ही सोना और चांदी अब आम जनता की पहुंच से काफी दूर निकल गए हैं। बाजार में मची इस भारी हलचल ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चांदी में एक ही दिन के भीतर ₹9,000 प्रति किलो की जो जबरदस्त तेजी आई है, उसने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। हर बीतते घंटे के साथ कीमतें नया इतिहास रच रही हैं, जिससे आम खरीदारों के बीच अब काफी चिंता और अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है।
Historic Records at MCX and Local Markets
मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर चांदी की कीमतों ने आज ₹2,32,741 प्रति किलो का जादुई आंकड़ा छू लिया है। सोने की चमक भी पीछे नहीं है; इसमें ₹1,119 की बढ़त के साथ भाव ₹1,39,216 प्रति ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह तेजी पिछले कई दिनों से जारी है और साल के आखिरी हफ्ते में बढ़ी मांग ने इन कीमतों को उस स्तर पर पहुँचा दिया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक किसी ने नहीं की थी।
Impact of Global Economy and Dollar Weakness
इस रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार की उठापटक है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आने की वजह से दुनियाभर के निवेशक अब ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की ओर भाग रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीदों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड स्पॉट प्राइस करीब $4,500 प्रति औंस के पार निकल चुका है, जिसका सीधा असर हमारे घरेलू सराफा बाजार पर साफ़ दिखाई दे रहा है।
Industrial Boom and Rising Global Tensions
केवल निवेश ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगों में बढ़ती मांग भी चांदी को महंगा बना रही है। आजकल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) जैसी ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ में चांदी का इस्तेमाल काफी ज्यादा होने लगा है, जिससे बाजार में इसकी कमी महसूस की जा रही है। इसके अलावा, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे राजनीतिक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता ने निवेशकों को डरा दिया है। इसी असुरक्षा की भावना की वजह से लोग अपना पैसा जमीन या शेयर के बजाय सोने-चांदी में रखना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं।