Benefits of redis: सर्दियों के मौसम में मूली न केवल हमारी थाली का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी इसे एक ‘सुपरफूड’ माना जाता है। सलाद, पराठे या अचार के रूप में खाई जाने वाली मूली फाइबर, विटामिन C, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह शरीर को अंदर से साफ (डिटॉक्स) करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में बहुत मददगार साबित होती है। इसके तीखे स्वाद के पीछे इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो सर्दियों में होने वाली बीमारियों से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं।
Digestive and Heart Health Benefits
पाचन तंत्र के लिए मूली को किसी औषधि से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद उच्च फाइबर कब्ज की समस्या को जड़ से खत्म करने और पेट को साफ रखने में सहायक होता है। चूंकि मूली में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह शरीर की सूजन कम करने और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने में भी प्रभावी है। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में मूली का सेवन करने से दिल की सेहत में सुधार होता है और रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
Precautions for Thyroid Patients
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, हर किसी के लिए मूली का सेवन फायदेमंद नहीं होता। खासकर थायराइड की समस्या से जूझ रहे लोगों को कच्ची मूली खाने से परहेज करना चाहिए। मूली में ‘गोइट्रोजेनिक’ तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में थायराइड हार्मोन बनने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। यदि आप थायराइड की दवा ले रहे हैं, तो कच्ची मूली उन दवाओं के असर को भी कम कर सकती है। ऐसे मरीजों के लिए मूली को पकाकर या बहुत ही सीमित मात्रा में खाना ही सुरक्षित माना जाता है।
Acidity and Digestive Sensitivity
जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर है या जिन्हें अक्सर गैस, एसिडिटी और पेट फूलने (Bloating) की शिकायत रहती है, उनके लिए मूली मुश्किलें बढ़ा सकती है। मूली की तासीर गर्म होती है और यह पचने में भारी मानी जाती है, जिससे कमजोर पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेष रूप से खाली पेट या रात के समय मूली का सेवन करने से एसिड रिफ्लक्स और पेट में जलन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए, यदि आपको पेट से जुड़ी पुरानी परेशानियां हैं, तो मूली को हमेशा दोपहर के भोजन में ही शामिल करें।