दाने के बदले मौत दे रहा कबूतर, सांस से फैला रहा भयावह संक्रमण

भारतीय समाज में कबूतरों को दाना डालना सदियों से पुण्य और जीव-दया का प्रतीक माना जाता रहा है। पार्कों, चौकों और छतों पर पक्षियों को अनाज खिलाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन हाल के वर्षों में यह ‘पुण्य’ का कार्य स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर ‘संकट’ बनकर उभरा है। 22 दिसंबर 2025 को मुंबई हाई कोर्ट द्वारा दादर के एक व्यवसायी पर सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना खिलाने के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाना इस दिशा में एक बड़ा संकेत है। अदालत ने इसे केवल गंदगी नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक बड़ा खतरा माना है।

Serious Health Risks from Pigeon Droppings

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का सबसे बड़ा कारण कबूतरों की बीट (मल) और उनके पंख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कबूतरों की बीट में कई तरह के हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं। जब यह मल सूख जाता है, तो इसके कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यह संक्रमण इतना सूक्ष्म होता है कि इंसान को पता भी नहीं चलता कि वह कब गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी इसी खतरे को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर दाना डालने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।

Severe Lung and Brain Diseases Caused by Fungi

कबूतरों से फैलने वाली बीमारियों की सूची काफी डरावनी है। इसमें सबसे प्रमुख ‘हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस’ है, जिसे ‘पिजन ब्रीडर्स लंग’ भी कहा जाता है। इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और धीरे-धीरे वे काम करना बंद कर देते हैं। इसके अलावा ‘क्रिप्टोकोकोसिस’ नाम का फंगल इंफेक्शन फेफड़ों से शुरू होकर इंसान के दिमाग तक पहुँच सकता है, जो जानलेवा साबित होता है। सिटाकोसिस और हिस्टोप्लास्मोसिस जैसी बीमारियां भी निमोनिया और फ्लू जैसे गंभीर लक्षण पैदा करती हैं, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है।

The Growing Conflict

कबूतरों को दाना खिलाने के मुद्दे पर अब परंपरा और विज्ञान के बीच बहस छिड़ गई है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जैन समुदाय और कई अन्य धर्मों में इसे जीव-दया माना जाता है, लेकिन शहरों की बढ़ती आबादी के बीच कबूतरों की अनियंत्रित संख्या (जो मुंबई जैसे शहरों में 150% तक बढ़ गई है) एक बड़ा संकट है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर पक्षियों को खिलाना ही है, तो इसके लिए बस्तियों से दूर निर्धारित जगहें तय की जानी चाहिए। सार्वजनिक पार्कों, अस्पतालों और रिहायशी सोसायटियों में इस पर सख्ती जरूरी है।

Extreme Danger for Children and Senior Citizens

पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के डॉक्टर) चेतावनी देते हैं कि कबूतरों के कारण होने वाला संक्रमण सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए घातक है जो पहले से अस्थमा या सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में एक बच्चे की मौत का मामला भी सामने आया था, जिसे कबूतरों से होने वाला संक्रमण बताया गया। दिल्ली नगर निगम (MCD) भी अब एनजीटी (NGT) के निर्देश के बाद सख्त कानूनी प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है, ताकि लोगों को इस अदृश्य खतरे से बचाया जा सके।

Call for Awareness and Safe Feeding Practices

समय की मांग है कि हम आस्था और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाएं। कबूतरों को ऐसी जगहों पर न खिलाएं जहाँ हवा का वेंटिलेशन कम हो या जहाँ लोगों की भारी आवाजाही रहती हो। शहरों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि नागरिक प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। याद रखें, पक्षियों के प्रति दया भाव रखना अच्छी बात है, लेकिन यह किसी इंसान की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

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