Anganwadi Jobs 2026: साल 2026 की शुरुआत आंगनवाड़ी बहनों के लिए नई उम्मीदें और कुछ बड़ी चुनौतियां लेकर आ रही है। सरकार अब आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण केंद्र तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इन्हें बच्चों की शुरुआती शिक्षा के ‘हाईटेक सेंटर’ के रूप में विकसित कर रही है। 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले नए निर्देशों के अनुसार, अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पारंपरिक रजिस्टरों को छोड़कर डिजिटल माध्यमों को अपनाना होगा ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पारदर्शिता के साथ पहुँच सके।
नए साल से आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाएगी। अब ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत आंगनवाड़ी बहनों को आधुनिक तकनीक और स्मार्टफोन से जोड़ा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर दी जाने वाली स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को और बेहतर बनाना है। अब हर बच्चे और महिला का डेटा कागजों के बजाय सरकारी सर्वर पर सुरक्षित रहेगा, जिससे काम में पारदर्शिता आएगी और योजनाओं की रिपोर्टिंग करना आसान हो जाएगा।
First Task: Issuing the ‘Vidya Arambh Certificate’
1 जनवरी 2026 से आंगनवाड़ी बहनों के जिम्मे जो पहला सबसे महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है, वह है ‘विद्या आरंभ सर्टिफिकेट’ तैयार करना।
क्या है यह: यह 3 से 6 साल के बच्चों के लिए एक प्रकार का प्रोग्रेस कार्ड या रिपोर्ट कार्ड होगा।
फायदा: यह सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण होगा कि बच्चे ने अपनी शुरुआती शिक्षा आंगनवाड़ी से पूरी की है।
एडमिशन में आसानी: जब ये बच्चे बड़े प्राइमरी स्कूलों में एडमिशन के लिए जाएंगे, तो यह सर्टिफिकेट उनके बहुत काम आएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अब हर बच्चे की सीखने की क्षमता का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
Second Task: Smart Classes and Geo-tagged Attendance
दूसरा बड़ा बदलाव आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने से जुड़ा है। अब आंगनवाड़ी बहनों को पारंपरिक तरीके से हाजिरी लगाने के बजाय जियो-टैग्ड अटेंडेंस (Geo-tagged Attendance) लगानी होगी।
स्मार्ट शिक्षण: चयनित केंद्रों पर अब एलईडी टीवी (LED TV) लगाए जा रहे हैं, जहाँ बहनों को बच्चों को डिजिटल माध्यम से कविताएं और कहानियां सिखानी होंगी।
ऑनलाइन रिपोर्टिंग: अब केंद्र पर मौजूद रहकर ही अपनी और बच्चों की फोटो ऐप पर अपलोड करनी होगी।
भोजन की निगरानी: प्रतिदिन बनने वाले मिड-डे मील (गर्म पके भोजन) और केंद्र की साफ-सफाई की फोटो भी अब उसी समय ऐप पर डालना अनिवार्य होगा।
Monitoring and Training for Workers
इन नए नियमों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार आंगनवाड़ी बहनों को 7 दिवसीय विशेष ट्रेनिंग भी दे रही है। अब सुपरवाइजर और सीडीपीओ (CDPO) ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ के जरिए सीधे केंद्रों की निगरानी करेंगे। अगर कोई केंद्र समय पर नहीं खुलता या डिजिटल डेटा अपडेट नहीं किया जाता, तो इसकी सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुँच जाएगी। इसके साथ ही, भीषण ठंड को देखते हुए 15 जनवरी 2026 तक केंद्रों के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि छोटे बच्चों को राहत मिल सके।
The Road Ahead: Benefits of Modernization
इस पूरी नई व्यवस्था से कई फायदे होने वाले हैं। डिजिटल अटेंडेंस से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और डेटा सुरक्षित रहेगा। स्मार्ट क्लासेज से बच्चों का मन पढ़ाई में लगेगा और उन्हें प्राइवेट स्कूलों जैसी आधुनिक शिक्षा मिल पाएगी। यह कदम न केवल आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि बच्चों के भविष्य की नींव को भी ठोस बनाएगा।