Land Registry Rule: भारत में साल 2026 की शुरुआत के साथ ही संपत्ति के हस्तांतरण और मालिकाना हक से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव लागू कर दिए गए हैं। Land Registry New Rule 2026 के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य जमीन-जायदाद के लेन-देन को डिजिटल बनाना और पारिवारिक विवादों को कम करना है। ये नए नियम न केवल धोखाधड़ी पर लगाम लगाएंगे, बल्कि समाज के बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों के अधिकारों को भी नई मजबूती प्रदान करेंगे। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से।
बुजुर्गों का सम्मान और अधिकार
संपत्ति कानूनों में सबसे बड़ा मानवीय बदलाव वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किया गया है। अक्सर देखा गया है कि बच्चे संपत्ति अपने नाम कराने के बाद बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने लगते हैं। अब यदि कोई संतान अपने माता-पिता की सेवा या देखभाल नहीं करती है, तो माता-पिता उन्हें दी गई संपत्ति (गिफ्ट डीड) को कानूनी रूप से रद्द कर वापस ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट और नए ट्रिब्यूनल नियमों के अनुसार, संपत्ति का हस्तांतरण केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बच्चों की नैतिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। माता-पिता को अधिकार है कि वे सेवा न करने वाले बच्चों को अपने घर से बाहर निकाल सकें।
स्व-अर्जित संपत्ति पर पिता का एकाधिकार
अक्सर बेटों में यह गलतफहमी रहती है कि पिता की हर संपत्ति पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। यदि पिता ने अपनी खुद की कमाई से कोई मकान या जमीन खरीदी है, तो वह उसकी ‘स्व-अर्जित संपत्ति’ कहलाती है। इस पर बेटे का कोई कानूनी दावा नहीं बनता। पिता जिसे चाहें, उसे यह संपत्ति वसीयत कर सकते हैं। माता-पिता जब चाहें अपने बेटे और बहू को घर खाली करने का आदेश दे सकते हैं। हालांकि, ‘पैतृक संपत्ति’ (जो पूर्वजों से मिली हो) में बेटों और बेटियों का हिस्सा पहले की तरह सुरक्षित रहेगा।
जमीनी बंटवारे की उलझनों का अंत
भाइयों और रिश्तेदारों के बीच संयुक्त जमीन के बंटवारे को लेकर सालों तक चलने वाले मुकदमों को खत्म करने के लिए प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। अब यदि कोई हिस्सेदार अपनी जमीन का हिस्सा अलग करना चाहता है, तो उसे बाकी हिस्सेदारों की मिन्नतें करने की जरूरत नहीं है। वह राजस्व विभाग (Revenue Department) में आवेदन देकर अपना मालिकाना हक अलग करवा सकता है। जमीन के सभी रिकॉर्ड अब ऑनलाइन और कंप्यूटर पर उपलब्ध हैं। इससे कोई भी व्यक्ति फर्जी कागजात के जरिए किसी दूसरे की जमीन पर कब्जा या धोखाधड़ी नहीं कर पाएगा।
बेटियों की बराबरी और दामाद का स्थान
महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब पैतृक और स्व-अर्जित, दोनों तरह की संपत्तियों में बेटी का अधिकार बेटे के बिल्कुल बराबर होगा। शादी के बाद भी बेटी अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी मांग सकती है। कानून ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी दामाद का अपने ससुराल की संपत्ति पर कोई स्वतः अधिकार नहीं होता। दामाद केवल तभी संपत्ति पा सकता है, जब उसके ससुर ने कानूनी तौर पर (वसीयत या गिफ्ट के जरिए) उसे कुछ दिया हो।
जमीन अधिग्रहण और उचित मुआवजा
सरकारी परियोजनाओं (जैसे सड़क या रेलवे) के लिए ली जाने वाली जमीन के मामले में भी अब नियम काफी सख्त और पारदर्शी हो गए हैं। मुआवजे से पहले बेदखली नहीं: अब किसी भी किसान या जमीन मालिक को तब तक उसकी जमीन से नहीं हटाया जा सकता, जब तक उसे बाजार दर के हिसाब से उचित मुआवजा न मिल जाए।
पुनर्वास की जिम्मेदारी
मुआवजे के साथ-साथ, प्रभावित परिवारों के रहने और रोजगार (पुनर्वास) की व्यवस्था करना भी अब सरकार की कानूनी जिम्मेदारी होगी। इससे भूमि अधिग्रहण से जुड़ी हिंसा और विवादों में कमी आने की उम्मीद है।