Stark VARG EX इलेक्ट्रिक बाइक बनी पहाड़ों की बादशाह, पेट्रोल बाइक को पछाड़ बनी नंबर एक

Stark VARG EX: इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों ने अब तक अपनी रफ़्तार और शांत इंजन से लोगों को प्रभावित किया था, लेकिन अब इन्होंने दुनिया के सबसे कठिन रास्तों पर भी अपनी बादशाहत कायम कर ली है। Stark Future और स्विस पर्वतारोही जिरी जाक (Jiri Zak) ने मिलकर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पेट्रोल मोटरसाइकिलों के सालों पुराने घमंड को तोड़ दिया है। उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे सक्रिय ज्वालामुखी पर इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक चढ़ाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है, जो भविष्य की तकनीक का एक जीता-जागता उदाहरण है।

The Historic Achievement at Ojos del Salado

यह रिकॉर्ड तोड़ सफर चिली और अर्जेंटीना की सीमा पर स्थित लॉस ओजोस डेल सालाडो (Los Ojos del Salado) ज्वालामुखी पर पूरा हुआ। जिरी जाक ने अपनी Stark VARG EX इलेक्ट्रिक बाइक को समुद्र तल से 6,721 मीटर (22,051 फीट) की अविश्वसनीय ऊंचाई तक पहुँचाया। यह वही पहाड़ है जहाँ पोर्श (Porsche) और जीप (Jeep) जैसी दिग्गज कंपनियाँ अपनी गाड़ियों की मजबूती का टेस्ट लेती हैं। यहाँ का वातावरण इतना खतरनाक है कि हाड़ कंपा देने वाली ठंड और बर्फीली हवाओं के बीच इंसान का सांस लेना भी दूभर हो जाता है।

Electric vs Petrol: Why Stark VARG Won the Battle

ऊंचाई पर होने वाले इस मुकाबले में इलेक्ट्रिक बाइक की जीत के पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। पेट्रोल इंजनों को चलने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है, और इतनी ऊंचाई पर हवा बहुत पतली हो जाती है, जिससे पेट्रोल इंजनों की ‘सांस फूलने’ लगती है और वे अपनी शक्ति खो देते हैं। इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक मोटर को चलने के लिए हवा की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से Stark VARG EX ऑक्सीजन की कमी के बावजूद अपना पूरा टॉर्क (Torque) और ताकत देने में सफल रही। इसके अलावा, इसमें गियर बदलने का झंझट न होने के कारण राइडर का पूरा ध्यान केवल कठिन रास्तों और संतुलन पर रहा।

A Standard Bike with Extraordinary Performance

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ पेट्रोल बाइकों को ऐसी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनमें इंजन से लेकर फ्यूल सिस्टम तक कई बड़े बदलाव करने पड़ते हैं, वहीं Stark VARG EX ने यह कारनामा बिना किसी विशेष मॉडिफिकेशन के कर दिखाया। जिरी जाक ने इस ऐतिहासिक जीत पर कहा कि दो साल पहले यह महज एक सपना था। ऐसी ऊंचाइयों पर एक छोटी सी गलती जान ले सकती थी, लेकिन इलेक्ट्रिक तकनीक के भरोसे ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। यह उपलब्धि साबित करती है कि आने वाला समय पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का है।

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